महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन की वर्चुअल बैठक में संगठनात्मक संविधान की मर्यादा का मुद्दा उठा, नियुक्तियों की प्रक्रिया पर जताई चिंता

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संविधान के अनुरूप ही हों संगठनात्मक नियुक्तियां, वर्षों से कार्यरत पदाधिकारियों की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं

बिलासपुर, छत्तीसगढ़ | 2 नवंबर 2026

महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन समिति, छत्तीसगढ़ एवं जिला पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक 2 नवंबर 2026 को आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता आयुष्मती सविता बौद्ध संकल्पी ने की। बैठक में संगठन की वर्तमान गतिविधियों, प्रदेश एवं जिला स्तर पर कार्यरत समितियों की भूमिका, संगठनात्मक विस्तार तथा हाल ही में सामने आए नियुक्ति संबंधी घटनाक्रमों पर विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में विशेष रूप से 13 तारीख को समिति के साथ हुई घटना को निंदनीय बताते हुए गंभीर चिंता व्यक्त की गई। उपस्थित पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने कहा कि संगठन के लिए वर्षों से समर्पण एवं निष्ठा के साथ कार्य कर रहे पदाधिकारियों का सम्मान और मनोबल बनाए रखना संगठनात्मक नेतृत्व की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। किसी भी निर्णय अथवा गतिविधि से कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर नहीं होना चाहिए।

संगठनात्मक नियुक्तियों में संविधान का पालन अनिवार्य

बैठक का एक महत्वपूर्ण विषय प्रदेश प्रभारी द्वारा पदाधिकारियों की नियुक्ति से संबंधित पहल एवं प्रक्रिया रहा। इस विषय पर उपस्थित पदाधिकारियों ने अपनी संवैधानिक एवं संगठनात्मक आपत्ति दर्ज कराई।

बैठक में प्रदेश प्रभारी द्वारा कथित रूप से संगठनात्मक संविधान एवं निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत की गई नियुक्तियों के विषय पर भी चर्चा की गई। पदाधिकारियों का कहना था कि समिति के संविधान (बायलॉज) में नियुक्तियों की प्रक्रिया एवं अधिकार क्षेत्र स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं। इसके अनुसार प्रदेश स्तर पर नियुक्तियों का अधिकार प्रदेश अध्यक्ष के निर्धारित अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आता है।

पदाधिकारियों ने सवाल उठाया कि जब संगठन का संविधान नियुक्तियों के अधिकार एवं प्रक्रिया को स्पष्ट करता है, तो उसका पालन किए बिना नियुक्तियों की पहल करना उचित कैसे हो सकता है?

विशेष रूप से यह चिंता व्यक्त की गई कि छत्तीसगढ़ में विगत कई वर्षों से सक्रिय रूप से कार्यरत प्रदेश एवं जिला स्तर के पदाधिकारियों के साथ इस विषय पर न तो आवश्यक विचार-विमर्श किया गया और न ही संगठन की स्थापित प्रक्रिया के अनुरूप सामूहिक सहमति बनाने का प्रयास किया गया।

वर्षों से कार्यरत पदाधिकारियों की उपेक्षा पर जताई नाराजगी

बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संगठन किसी व्यक्ति विशेष की इच्छा से नहीं, बल्कि अपने संविधान, निर्धारित अधिकारों और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया से संचालित होता है। कोई भी पदाधिकारी अपने निर्धारित अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर निर्णय लेने की पहल करता है, तो इससे संगठनात्मक अनुशासन, पारदर्शिता और आपसी विश्वास प्रभावित होता है।

पदाधिकारियों ने कहा कि हम सभी संविधान को सर्वोपरि मानने वाले लोग हैं। इसलिए संगठन के भीतर भी संवैधानिक मर्यादाओं का पालन अनिवार्य होना चाहिए।

वर्तमान में छत्तीसगढ़ प्रदेश एवं जिला स्तर पर जो समितियां सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं, उनके अधिकारों, दायित्वों एवं वर्षों के संगठनात्मक योगदान की अनदेखी कर समानांतर नियुक्तियों अथवा एकतरफा निर्णयों की पहल करना उचित नहीं है। इससे न केवल कार्यरत पदाधिकारियों का मनोबल प्रभावित होता है, बल्कि संगठन की एकता और कार्यप्रणाली पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

बैठक में पदाधिकारियों ने अपने वैचारिक आक्रोश एवं असहमति को व्यक्त करते हुए अपेक्षा जताई कि भविष्य में कोई भी नियुक्ति, संगठनात्मक फेरबदल अथवा महत्वपूर्ण निर्णय समिति के संविधान में निर्धारित प्रावधानों, अधिकार क्षेत्र और विधिसम्मत प्रक्रिया के अनुरूप ही किया जाए।

छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों एवं तहसीलों में समिति विस्तार पर चर्चा

बैठक में छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों एवं तहसीलों में महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन समिति के विस्तार पर भी चर्चा की गई। संगठन को प्रदेश स्तर पर अधिक मजबूत बनाने, नए जिलों में जिम्मेदार एवं सक्रिय कार्यकर्ताओं को जोड़ने तथा प्रदेश एवं जिला समितियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया।

पदाधिकारियों ने कहा कि आंदोलन को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए प्रत्येक जिले एवं तहसील में सक्रिय टीम तैयार करना आवश्यक है। समिति का विस्तार संगठनात्मक संविधान, निर्धारित प्रक्रिया एवं सामूहिक सहमति के अनुरूप किया जाना चाहिए, ताकि संगठन की एकजुटता एवं अनुशासन बना रहे।

बैठक में सभी सदस्यों ने संगठन को मजबूत बनाने, संवैधानिक व्यवस्था के तहत सामूहिक नेतृत्व को आगे बढ़ाने तथा महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन के उद्देश्यों को व्यापक स्तर पर जन-जन तक पहुंचाने के लिए अपने विचार एवं सुझाव रखे।

बैठक में उपस्थित पदाधिकारी एवं सदस्य —

प्रदेश स्तर के पदाधिकारी:

  1. सविता बौद्ध — प्रदेश अध्यक्ष
  2. चेतना ताम्हाणे — कार्यकारी अध्यक्ष
  3. सुजाता वहने — प्रदेश उपाध्यक्ष
  4. बसंत बौद्ध — प्रदेश सचिव
  5. जयश्री बौद्ध — प्रदेश कोषाध्यक्ष
  6. डॉ. अरविंद चौधरी — प्रदेश विधि सलाहकार
  7. अल्का बौद्ध — प्रदेश सलाहकार
  8. सरोज बौद्ध — प्रदेश सलाहकार
  9. विजय बोरकर — प्रदेश सलाहकार
  10. मुकेश गोंडाले — प्रदेश सलाहकार
  11. अनामिका पाटील — प्रदेश सलाहकार
  12. प्रकृति बौद्ध — प्रदेश सलाहकार*

जिला बिलासपुर के पदाधिकारी:

  1. शीतल रामटेके — जिला अध्यक्ष
  2. वंदना भांगे — जिला कार्यकारी अध्यक्ष
  3. स्वराज मेश्राम — मीडिया प्रभारी
  4. उज्ज्वला रंगारी — जिला कोषाध्यक्ष
  5. कमलेश लवत्रे — जिला सह कोषाध्यक्ष*

संविधान सर्वोपरि, सामूहिक नेतृत्व ही संगठन की मजबूती का आधार

बैठक के अंत में उपस्थित पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने स्पष्ट संदेश दिया कि संगठन की मजबूती का आधार आपसी सम्मान, पारदर्शिता, संवैधानिक अनुशासन और सामूहिक नेतृत्व है। किसी भी पदाधिकारी को अपने निर्धारित अधिकार क्षेत्र की मर्यादा का उल्लंघन नहीं करना चाहिए। संगठन में पद महत्वपूर्ण हो सकता है, लेकिन संविधान उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है।

पदाधिकारियों ने अपेक्षा व्यक्त की कि संबंधित नेतृत्व इस सामूहिक चिंता को गंभीरता से लेते हुए भविष्य में ऐसे किसी भी कदम से बचेगा, जिससे वर्षों से संगठन के लिए कार्य कर रहे प्रदेश एवं जिला स्तर के पदाधिकारियों का मनोबल प्रभावित हो।

संगठन का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का प्रभाव स्थापित करना नहीं, बल्कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत सामूहिक रूप से आंदोलन को मजबूत करना होना चाहिए।

स्वराज मेश्राम
जिला मीडिया प्रभारी
महाबोधि महाविहार मुक्ति आंदोलन समिति
बिलासपुर छत्तीसगढ़

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